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Story- Sangeet Aur Dard Ka Rishta
Genre : Music

Story- Sangeet Aur Dard Ka Rishta

Story

संगीत और दर्द का रिश्ता (रुसी लोक कथा )

बहुत समय पहले की बात है . रूस के एक गाँव में एक गिटार वादक रहता था . वह अपना संगीत सब को सुनाना चाहता था . लेकिन कोई भी ग्रामवासी उसके संगीत को सुनना पसंद नहीं करता था , क्योंकि उसके गिटार से मधुर सुर नहीं निकलते थे . सब ग्रामवासी उसे मूर्ख समझते थे और उसकी हरकतों से तंग आ चुके थे .

वह गिटार वादक भी इस बात के लिए बहुत दुखी था कि ग्रामवासी उसका संगीत नहीं सुनते . उसने जब बहुत सोचा तो उसे लगा कि उसके संगीत में ही कहीं कुछ कमी है . हो सकता है गिटार ही ठीक न हो , इसमें जो लकड़ी लगी है , कहीं वही न ख़राब हो.

बस , एक दिन वह अच्छी लकड़ी की खोज में जंगल की ओर चल पड़ा . जंगल में आगे बढ़ते हुए अचानक उसने देखा कि एक पक्षी उड़ता हुआ धम्म से पृथ्वी पर आ गिरा . नीचे गिरते ही उसके गले से एक दर्दनाक चीख निकली . गिटारवादक उस चीख को सुनकर बौखला गया , वह तेजी से पक्षी के पास पहुंचा . उसने देखा कि पक्षी बहुत बुरी तरह से जख्मी था और उसके पैरों से निरंतर खून बह रहा था . गिटारवादक को पक्षी के ऊपर दया आ गयी . उसने उस पक्षी को उठाया और  अपने घर ले आया .
इन सब कामों में गिटारवादक लकड़ी की बात भूल गया . घर आकर उसने पक्षी के घावों को साफ किया और उन पर मरहम लगाया . उसे थोड़ा सा खिलाकर नरम नरम बिस्तर पर सुला दिया . गिटारवादक पक्षी की सेवा करने में अपने गिटार को बिल्कुल भूल बैठा था . दूसरी ओर पहले तो गाव वालों  को उसकी चिंता नहीं हुई , लेकिन तीन-चार दिन बाद उन्हें परेशानी होने लगी कि आखिर वह मूर्ख गिटारवादक कहाँ गया

एक दिन ग्रामवासियों ने उसकी खिड़की से झांक कर देखा तो पाया कि गिटारवादक बड़े प्यार से पक्षी के घाव पर मरहम लगा रहा था . यह देख कर ग्रामवासियों ने चैन कि साँस ली . चलो ! अब इस मूर्ख के कर्कश सुर तो नहीं सुनने पड़ेंगे .

लेकिन अचानक उन लोगों में से एक को ख्याल आया कि यह पक्षी तो दो-चार दिन में ठीक हो जायेगा फिर यह गिटारवादक हमें तंग करेगा . वो लोग गिटारवादक से पिंड छुडाने का समाधान खोजने लगे .अंत में उन्होंने उपाय खोज लिया .

थोड़ी देर बाद जब गिटारवादक दवा लेने बाजार गया तो एक आदमी  योजनानुसार उस पक्षी को पुनः जंगल में छोड़ आया .
उधर जब गिटारवादक अपने घर लौटा और पक्षी को न पाया तो बहुत दुखी हुआ . उसने सारा घर ढूढ़ मारा लेकिन पक्षी का कहीं अता-पता  नहीं चला . बार-बार उसके दिमाग में एक बात आती कि अभी तो पक्षी के घाव भी नहीं भरे थे , उसके पैरों में उड़ने कि ताकत भी नहीं थी . कहीं इधर -उधर भी दिखाई नहीं दे रहा , कही बिल्ली तो नहीं खा गयी .

गिटारवादक ने अपना पूरा घर देख डाला लेकिन पक्षी का कहीं नामोनिशान नहीं दिखा . गिटारवादक ने सभी
ग्रामवासियों  से पूछा. किन्तु सब अनजान बने रहे . जो आदमी पक्षी को उठाकर जंगल में छोड़ आया था उसने कहा कि कही कोई बाज तो उसे नहीं उठा ले गया .

ये सब बातें सुनकर गिटारवादक का दिल डूबने लगा . उसकी आखों में घायल पक्षी कि चीखें गूंजने लगी .एक अनोखा दर्द उसके दिल को मथने लगा .  वह पूरे गाँव में घर-घर घूमा , सभी जगहों पर गया . यहाँ तक कि आस-पास के गाँव में भी गया. लेकिन उसे पक्षी के के बारे में कुछ पता नहीं चला और उसका दर्द बढ़ता ही चला गया .अब यह दर्द उसकी बर्दाश्त के बाहर हो गया .

अंत में वह निढाल होकर अपने घर कि ओर लौट पड़ा . घर पहुच कर वह एक चारपाई पर ढेर हो गया . वह काफी देर तक बेहोश रहा . जब उसे होश आया तो उसने चारों ओर कमरे में निगाह दौड़ाई , तो उसे एक कोने में तिरस्कृत -सा गिटार दिखाई दिया .

थोड़ी देर तक वह उसे देखता रहा . फिर न जाने क्या सोच कर उसने गिटार उठा लिया और उसे बजाना शुरू कर दिया. वह गिटार बजाता ही चला गया , घंटे बीते , दिन बीता यहाँ तक कि रात बीतती चली गयी . लेकिन उसने गिटार बजाना बंद नहीं किया . उसके दिल में दर्द था और उसके हाथ में गिटार .

उसे थोड़ी देर में आभास हुआ कि वहां बहुत से लोग खड़ें हैं . न केवल उसके गाँव के अपितु आस-पास के गाँव के भी लोग वहां खड़े थे . वे लोग शांति पूर्वक तन्मय होकर उसका संगीत सुन रहे थे और उनकी आँखों से आंसू बह रहे थे .

इसलिए ऐसा कहा जाता  है कि संगीत में जब तक दर्द न हो तब तक वह कर्ण प्रिय नहीं होता .

प्रस्तुति
तूलिका श्रीवास्तव

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